इस साल तक बिजली कंपनियों पर होगा 4.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज: क्रिसिल रिपोर्ट

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BYFirst published: June 5, 2020, 9:22 PM IST
नई दिल्ली. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) ने शुक्रवार को कहा कि बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMS) का कर्ज चालू वित्त वर्ष (FY-21) के अंत तक बढ़कर 4.5 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच जाने की आशंका है. क्रिसिल ने एक बयान में कहा कि सरकार ने वितरण कंपनियों के लिये पिछले महीने 90,000 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की. इससे कंपनियों को राहत मिली है. लेकिन वितरण कंपनियों के सतत विकास के लिये संरचनात्मक सुधारों की जरूरत है. बयान के अनुसार पैकेज से राज्य की वितरण कंपनियों को बिजली उत्पादक कंपनियों के पिछले बकाये के निपटान में मदद मिलेगी. बिजली वितरण कंपनियों को भारी नुकसान क्रिसिल ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण बिजली मांग कम है और नकदी का नुकसान हो रहा है, ऐसे में वितरण कंपनियो के ऊपर वित्तीय संस्थानों का कर्ज बढ़कर 2020-21 के अंत तक 4.5 लाख करोड़ रुपये या पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 30 फीसदी अधिक हो जाने की आशंका है.यह भी पढ़ें: कोरोनाकाल में अब आप बिना कोई बटन दबाए निकाल सकेंगे ATM से कैश, ऐसे करेगा काम संरचनात्मक सुधारों की जरूरत रेटिंग एजेंसी ने 15 राज्यों की 34 सार्वजनिक क्षेत्र की वितरण कंपनियों के अध्ययन के आधार पर कहा कि कर्ज में इतनी मात्रा में वृद्धि से वितरण कंपनियों का ऋण ‘प्रोफाइल’ कमजोर होगा. ऐसे में उनके बाजार में बने रहने के लिये संरचनात्मक सुधारों (Structural Reforms) की जरूरत होगी. देश की कुल बिजली मांग में इन वितरण कंपनियों की हिस्सेदारी 80 फीसदी से अधिक है. बयान के अनुसार फिलहाल पांच वितरण कंपनियों में से केवल एक अपनी नकद स्थिति बजटीय सब्सिडी के आधार पर कर्ज की किस्त लौटाने की स्थिति में हैं. पिछले साल के मुकाबले कमजोर हुई मांग क्रिसिल ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी और उसकी रोकथाम के लिये जारी ‘लॉकडाउन’ से चालू वित्त वर्ष में बिजली मांग कम होने, लागत बढ़ने तथा नुकसान से स्थिति खराब होगी जबकि मांग के लिहाज से पिछले वित्त वर्ष का तुलनात्मक आधार पहले से ही कमजोर था. चालू वित्त वर्ष में 58 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक मनीष गुप्ता ने कहा, ‘‘मांग में गिरावट के बीच उच्च लागत और नकद प्रवाह में बाधा से चालू वित्त वर्ष में वितरण कंपनियों का प्रति यूनिट परिचालन अंतर बढ़कर 83 पैसा प्रति यूनिट हो जाएगा. अन्य शब्दों में राज्य सरकारों से अधिक सब्सिडी मदद के बावजूद पिछले वित्त वर्ष की तुलना में चालू वित्त वर्ष में नकदी नुकसान लगभग दोगुना होकर 58,000 करोड़ रुपये का हो जाने का अनुमान है.’’ यह भी पढ़ें: अब बिना कोई पैसे दिए, घर बैठे 10 मिनट में बन जाएगा PAN कार्ड, जानिए प्रोसेस