गोलगप्‍पे बेचे, टैंट में रहा, अब 17 साल की उम्र में तूफानी बल्लेबाजी से मचाया धमाल

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BYNews18Hindi Updated: October 9, 2019, 12:27 PM IST
अलूर: सलामी बल्लेबाज यशस्वी जयसवाल (113) (Yashasvi Jaiswal) की पहली शतकीय पारी और आदित्य तारे (86) के साथ पहले विकेट के लिए 152 रन की साझेदारी के दम पर मुंबई (Mumbai) ने विजय हजारे ट्रॉफी (Vijay Hazare Trophy) के ग्रुप ए के मैच में गोवा को 130 रन से शिकस्त दी. मुंबई ने 50 ओवर में चार विकेट पर 362 रन का बड़ा स्कोर बनाने के बाद गोवा की पारी को 48.1 ओवर में 232 रन पर समेट दिया. 17 साल के जयसवाल का लिस्ट ए क्रिकेट में यह सिर्फ दूसरा ही मैच है. उन्होंने 123 गेंद की पारी में छह चौके और पांच छक्के लगाए. कप्तान श्रेयस अय्यर (29 गेंद में 47), सूर्यकुमार यादव (21 गेंद में नाबाद 34) और शिवम दूबे (13 गेंद में नाबाद 33 रन) की अंतिम ओवर में तेज तर्रार पारी से मुंबई की टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया. गोवा के लिए स्नेहल कौथांकर (50) ही अर्धशतकीय पारी खेल सके. जयसवाल-तारे ने जोड़े 150 रन पहले बल्‍लेबाजी करने उतरी मुंबई के बल्‍लेबाजों ने गोवा के गेंदबाजों की जमकर खबर ली. सलामी बल्‍लेबाज यशस्‍वी जयसवाल और आदित्‍य तारे ने पहले विकेट के लिए 152 रन जोड़े. दोनों ने यह साझेदारी 29 ओवर में की. तारे के आउट होने से यह जोड़ी टूटी. लेकिन इसके बाद मुंबई की स्‍कोरिंग स्‍पीड बढ़ गई. सिद्धेश लाड ने 23 गेंद में 4 चौके व 1 छक्‍के की मदद से 34 रन उड़ाए. दूसरे विकेट के लिए लाड और जायसवाल ने 72 रन जोड़े.
यशस्‍वी जयसवाल को सचिन तेंदुलकर ने अपना बल्‍ला गिफ्ट किया था.
दुबे-यादव ने आखिरी 4 ओवर में उड़ाए 52 रन कप्‍तान श्रेयस अय्यर ने भी क्रीज पर आते ही तूफानी बल्‍लेबाजी शुरू की. उन्‍होंने 20 गेंद में 4 चौकों व 2 छक्‍कों की मदद से 47 रन उड़ाए. वे 47वें ओवर की दूसरी गेंद पर आउट हुए. इसके बाद 22 गेंद पर सूर्यकुमार यादव व शिवम दुबे ने मिलकर 52 रन उड़ा दिए. यादव ने 3 और दुबे ने 4 छक्‍के ठोके. घर छोड़कर मुंबई गए यशस्वी Loading... मुंबई को जीत दिलाने वाले यशस्वी की कहानी काफी संघर्षों भरी है. वे कम उम्र में ही क्रिकेट का सपना लेकर यूपी से मुंबई पहुंच गए थे. उनके पिता के लिए परिवार को पालना मुश्किल हो रहा था इसलिए उन्होंने ऐतराज़ भी नहीं किया. मुंबई में उनके चाचा के घर पर रहने के लिए ज्‍यादा जगह नहीं थी तो वे मुस्लिम यूनाइटेड क्लब से जुड़ गए. इसके एक टैंट में वे रहते थे. वे 3 साल तक टैंट में रहे. गोलगप्पे बेचे, भूखे रहे और फिर... उनके पिता कई बार पैसे भेजते लेकिन वे कभी भी काफी नहीं होते. राम लीला के समय आज़ाद मैदान पर यशस्वी ने गोलगप्पे भी बेचे. लेकिन इसके बावजूद कई रातों को उन्हें भूखा सोना पड़ता था. इसी दौरान उनकी मुलाकात एक स्‍थानीय कोच ज्‍वाला सिंह से हुई. उनसे मिलने के बाद यशस्‍वी की जिंदगी ने पलटी मारी और वे क्रिकेट में कामयाबी की सीढ़ियां चलते गए. उन्‍हें इंडिया अंडर 19 टीम में भी चुना गया था.

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