#MISSIONPAANI : दुनिया में बढ़ती बाढ़, क्या आने वाली है जलप्रलय?

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BYBhavesh SaxenaBhavesh Saxena | News18Hindi Updated: July 11, 2019, 9:05 PM IST
मनुस्मृति हो या बाइबिल, अनेक धर्मग्रंथों में उल्लेख है कि सृष्टि की रचना और अंत दोनों का कारण पानी है. लंबे समय से ये विचार भी विमर्श में रहा है कि तीसरा विश्वयुद्ध हुआ, तो पानी के मुद्दे पर ही होगा. ग्लोबल वॉर्मिंग के चलते ग्लेशियर पिघलने लगे हैं, समुद्री स्तर बढ़ता जा रहा है और मौसम इस कदर ऊटपटांग हो चुका है कि कब क्या हो, सही अंदाज़ा लगा पाना चुनौतीपूर्ण हो चुका है. ऐसे में सिर्फ भारत या एशिया ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में पानी से जुड़ी आपदाएं कहर ढा रही हैं. मुंबई और वॉशिंगटन में ताज़ा बाढ़ के संदर्भ में, आइए ये जानने की कोशिश करें कि इस साल पूरी दुनिया में पानी से कितनी तबाही मची है. #मिशनपानी : पूरा कवरेज यहां पढ़ें सबसे पहले तो ये ध्यान में रखना चाहिए कि जिसे हम प्राकृतिक आपदा कह रहे हैं, अस्ल में, वो आपदा प्राकृतिक है कितनी! क्योंकि मनुष्य ने प्रकृति को जो नुकसान पहुंचाया है, ये उसी की प्राकृतिक प्रतिक्रिया है. इस विचार पर पूरी दुनिया के विद्वान सहमत हो चुके हैं. इसलिए अब इसे प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि मानवनिर्मित तबाही ही कहा जाना चाहिए. बहरहाल, दुनिया में कई तरह के शोध हो रहे हैं, कई तरह की संस्थाएं हैं जो ये आकलन करने में जुटी हैं कि ऐसा क्यों, कैसे हो रहा है और इसके परिणाम क्या हैं. ज़रूरी जानकारियों, सूचनाओं और दिलचस्प सवालों के जवाब देती और खबरों के लिए क्लिक करें नॉलेज@न्यूज़18 हिंदी ऐसी ही एक संस्था है अमेरिका स्थित एओएन, जो दुनिया भर में ऐसी आपदाओं के कारण होने वाले नुकसान के आंकड़े जुटाती है. 120 देशों में करीब 50 हज़ार प्रतिनिधियों की मदद से ये आंकड़े जुटाने का काम किया जाता है और इन्हीं के आधार परहर साल के लिए एक रिपोर्ट तैयार की जाती है. इस रिपोर्ट के मुताबिक आपदाओं में इस साल 31 मार्च तक 8 बिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान हो चुका है. ऐसे ही और स्रोतों के एक अध्ययन से जानते हैं कि दुनिया भर में पानी से कितना नुकसान हो चुका है. भारत में इस साल का नुकसानएओएन ने दुनिया में इस साल प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान की जो रिपोर्ट जारी की है, उसमें 31 मार्च 2019 तक के आंकड़े हैं यानी इस तारीख से पहले तक की आपदाओं के डेटा को ही शामिल किया गया है. इसलिए इसमें मुंबई और असम की बाढ़ और ओडिशा में आए फानी तूफान के आंकड़े अभी शामिल नहीं हैं. ओडिशा में फानी तूफान से मची तबाही के बारे में आकलन है कि करीब 12 हज़ार करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ है. वहीं मुंबई और असम में बाढ़ के आकलन का काम जारी है और ये आंकड़ा भी हज़ारों करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है.
मुंबई में बाढ़ के आकलन का काम जारी है.
इस रिपोर्ट के मुताबिक इस साल 31 मार्च तक प्राकृतिक आपदाओं से भारत में करोड़ों डॉलर्स का नुकसान बताया गया है और कई हज़ारों की संख्या में इमारतों को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है. साथ ही, इस रिपोर्ट में उस वक्त के हिसाब से भी कहा गया था कि भारत में मौसम को लेकर हालात गंभीर हैं. अमेरिका में 4 अरब डॉलर की तबाही इस साल मार्च के महीने के मध्य तक बने रहे मौसम के चलते अमेरिका में भारी बर्फबारी व बारिश, रिकॉर्ड तापमान, तूफान और आंधी जैसी आपदाएं आती रहीं. मिसिसिपी नदी के बेसिन के इलाके में 28 मार्च को भारी बाढ़ ने तबाही मचाई. अमेरिका में पानी से जुड़ी आपदाओं से होने वाले नुकसान का अंदाज़ा 4 अरब डॉलर तक का लगाया गया और कम से कम 1 अरब डॉलर का नुकसान हो चुका, ये दावा किया गया.
ये है वॉशिंगटन में बाढ़ का नज़ारा. सोशल मीडिया पर सबसे चर्चित यही तस्वीर रही.
दूसरी ओर, हाल में, वॉशिंगटन में बने बाढ़ के हालात के चलते भारी तबाही हुई. एक दिन में ही एक महीने के लिए अपेक्षित बरसात हो जाने के कारण पूरे शहर में भारी नुकसान हुआ. इसके ठीक ठीक आकलन की रिपोर्ट अब तक नहीं आई है, लेकिन कुछ संस्थाओं के हवाले से कहा जा रहा है कि वॉशिंगटन की बाढ़ से जो नुकसान हुआ, उसका आंकड़ा करोड़ों डॉलर्स का हो सकता है. वहीं, कनाडा में मार्च में आई बाढ़ के कारण 1.10 करोड़ डॉलर के नुकसान का आकलन किया गया. ब्राज़ील, पैरेग्वे, बोलीविया, कोलंबिया, पेरू और इक्वाडोर में भी भारी बारिश के चलते काफी नुकसान हुआ. ईरान में डूबे साढ़े तीन अरब डॉलर ईरान के करीब एक दर्जन प्रांतों में मार्च और अप्रैल में भारी बारिश के चलते कई जगह बाढ़ जैसे हालात बने. इनमें 70 लोग मारे गए जबकि 600 से ज़्यादा घायल हुए. ईरान में बाढ़ के हालात के चलते साढ़े तीन अरब डॉलर का नुकसान हुआ. वहीं, इराक और सीरिया में भी बाढ़ के हालात रहे, लेकिन वहां नुकसान का आकलन नहीं हो सका. वहीं, दक्षिण अफ्रीका के तीन प्रांतों में ज़बरदस्त बाढ़ के हालात दिखे और अंगोला में भारी बरसात का कहर टूटा.
ईरान में बाढ़ ने कम से कम 70 लोगों की जान ली.
एशिया में हुई भारी तबाही मार्च की शुरूआत में ही अफगानिस्तान के छह प्रांतों में भारी बारिश से तबाही हुई और 45 मौतों के साथ ही, 4 हज़ार मकान उजड़ गए. इसी तरह पाकिस्तान में भी बाढ़ के चलते 25 लोगों के मारे जाने और दर्जनों मकानों के ढह जाने की खबरें रहीं. एशिया के इंडोनेशिया, नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों में भी बाढ़ या पानी से जुड़ी आपदाएं दर्ज की गईं. वहीं, चीन में भी बाढ़ से 4 करोड़ डॉलर के आर्थिक नुकसान के साथ ही ढाई हज़ार इमारतों को नुकसान पहुंचने की खबर है. अन्य देशों के हालात न्यूज़ीलैंड में भारी बारिश के चलते बाढ़ जैसे हालात बने जिसमें सैकड़ों भवन ढह गए और नुकसान का कुल आंकड़ा करोड़ों डॉलर्स में पहुंचने का अनुमान लगाया गया. अफ्रीका के मोज़ाम्बिक, ज़िम्बाब्वे और मलावी जैसे प्रांतों में भारी बारिश से काफी नुकसान हुआ. वहीं, यूरोप के कई हिस्सों में भी पेचीदा हालात बने. यूरोप में आंधी और तूफान के चलते करोड़ों डॉलर्स के नुकसान की आशंका है. जर्मनी और फ्रांस सहित मध्य व पश्चिम यूरोप में सबसे ज़्यादा गंभीर स्थिति का आकलन हुआ.
चीन में भी बाढ़ से 4 करोड़ डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ.
ये थी पिछले साल की कहानी वेदर, क्लाइमेट एंड कैटेस्ट्रॉफी इनसाइट की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018 में प्राकृतिक आपदाओं से पूरी दुनिया में 225 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था. हालांकि ये नुकसान 2017 की तुलना में कुछ कम था, लेकिन लगातार तीसरे साल ऐसा हुआ था कि आपदाओं से नुकसान के आंकड़ा 200 अरब डॉलर के पार पहुंचा. साल 2000 से अब तक दस बार ऐसा हो चुका है कि सालाना नुकसान का आंकड़ा 200 अरब डॉलर के पार गया हो. बाढ़ और चक्रवात हैं तबाही के बड़े कारण पिछले साल की रिपोर्ट में ये बात साफ हो गई थी कि दुनिया में प्राकृतिक आपदाओं से कुल जितना नुकसान होता है, उनमें बाढ़ और चक्रवातों के कारण होने वाला नुकसान सबसे ज़्यादा होता है. दूसरी बात, ये भी खास है कि भारत सहित एशिया पैसेफिक में सबसे ज़्यादा नुकसान देखा जाता है यानी कुल नुकसान का करीब 35 से 40 फीसदी. और तीसरी बात ये भी ध्यान देने लायक है कि भारत सहित दक्षिण एशिया या मध्य पूर्व में एक विडंबना बनी हुई है कि इन इलाकों में बाढ़ और सूखा, दोनों ही समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं.
मार्च 2019 में बाढ़ से दुनिया भर में 8 अरब डॉलर का नुकसान एओएन की रिपोर्ट में बताया गया.
इन रिपोर्टों के आधार पर कुल मिलाकर, कहा जा सकता है कि क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वॉर्मिंग से निपटने के लिए निर्णायक कदम उठाने का वक्त आ चुका है. अब अगर और देर या कोताही हुई तो दुनिया जलप्रलय के मुहाने पर है. जल ही जीवन है, ये सच है लेकिन मनुष्य की तबाही की वजह भी पानी ही होगा, इस बात को जितनी जल्दी समझ लिया जाए, उतना बेहतर है. यह भी पढ़ें- आपने कभी सोचा है कि मैलवेयरों, वायरसों के नाम इतने दिलचस्प क्यों होते हैं? ट्रंप की सोशल मीडिया समिट की क्यों हो रही है दुनियाभर में आलोचना?